Government school teacher’s dark deeds

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इंदौर: Indore Teacher Scandal:  इंदौर के ग्रामीण इलाके के एक शासकीय स्कूल के शिक्षकों द्वारा कक्षा चौथी की छात्राओं के साथ वर्ष 2016 में की गई घिनौनी हरकत और दो अर्थों में बात किए जाने के मामले में अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है और जांच प्रदेश के मुख्यमंत्री के सचिव को भेजी है। पूरे मामले का खुलासा सूचना के अधिकार के अंतर्गत मिली जानकारी के बाद हुआ और घटना के नौ साल बाद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा एक शिकायत पर संज्ञान लेने की बात सामने आई है।

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Indore Teacher Scandal:  इंदौर के खुड़ैल थाना क्षेत्र के एक शासकीय प्राथमिक स्कूल के दो शिक्षकों द्वारा कक्षा चौथी की कुछ छात्राओं ने अपने परिजनों के साथ वर्ष 2016 में शिकायत की थी। छात्राओं ने तत्कालीन कलेक्टर को दिए आवेदन में शिक्षकों द्वारा वॉशरूम जाने पर टिप्पणी करने और अश्लील कमेंट करने की शिकायत की थी। इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर ने जांच एसडीएम को सौंपी थी जहां एसडीएम ने जांच रिपोर्ट तैयार कर शिक्षकों द्वारा उक्त घटनाक्रम किए जाने की पुष्टि की थी।

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Indore Teacher Scandal:  शिक्षकों, परिजनों और स्कूल में पदस्थ अन्य शिक्षकों के बयान के आधार पर दोनों शिक्षकों पर एक-एक लाख रुपए के बॉन्ड ओवर लगाए जाने और आपराधिक मामला दर्ज करने की बात लिखी गई थी। साथ ही दोनों शिक्षकों को मानसिक रूप से विकृत भी बताया गया था। इस पूरे मामले में जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इंदौर के आरटीआई एक्टिविस्ट ने पूरे मामले में डिमांड ऑफ जस्टिस के तहत शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को की थी जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव को अग्रिम कार्रवाई करने के लिए केस भेजा है।

“इंदौर शासकीय स्कूल छात्रा उत्पीड़न मामला” में यह घटना कब की है?

यह घटना वर्ष 2016 की है, जब कक्षा चौथी की छात्राओं ने शिक्षकों पर अश्लील टिप्पणी और दोअर्थी बात करने की शिकायत की थी।

“इंदौर शासकीय स्कूल छात्रा उत्पीड़न मामला” की शिकायत किसे की गई थी?

शुरुआती शिकायत छात्राओं द्वारा अपने परिजनों के साथ तत्कालीन कलेक्टर को दी गई थी। बाद में एक आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी शिकायत भेजी।

“इंदौर शासकीय स्कूल छात्रा उत्पीड़न मामला” की जांच में क्या निष्कर्ष निकले थे?

एसडीएम की जांच रिपोर्ट में दोनों शिक्षकों द्वारा घटनाक्रम किए जाने की पुष्टि हुई थी और उन्हें मानसिक रूप से विकृत बताया गया था।

“इंदौर शासकीय स्कूल छात्रा उत्पीड़न मामला” में प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका रही?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत पर संज्ञान लिया और मामले को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया।

“इंदौर शासकीय स्कूल छात्रा उत्पीड़न मामला” में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

हालांकि जांच में दोष सिद्ध हुआ था, लेकिन पहले कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। अब पीएमओ के संज्ञान में आने के बाद पुनः मामला सक्रिय हुआ है और कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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