BMC Elections 2026: उद्धव-राज ठाकरे का संयुक्त वचननामा, मुंबई के लिए बड़े वादे

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मुंबई की राजनीति में शनिवार को एक दिलचस्प और अहम मोड़ देखने को मिला। करीब दो दशक बाद राजनीतिक मतभेद भुलाकर साथ आए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों के लिए अपना संयुक्त घोषणा-पत्र ‘वचननामा’ जनता के सामने रखा। इसे दोनों नेताओं ने “जनता के चरणों में समर्पित” बताते हुए मराठी मानुष और मुंबई के हितों की रक्षा के लिए बनी ‘शिव-शक्ति’ का प्रतीक बताया।
बता दें कि यह वचननामा 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया, जिन्हें मुंबई की सत्ता का सेमीफाइनल भी कहा जाता रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी)-एमएनएस गठबंधन ने अपने घोषणा-पत्र में किफायती आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है।
गौरतलब है कि इस गठबंधन ने घरेलू सहायिकाओं और कोली समुदाय की महिलाओं के लिए ‘स्वाभिमान निधि’ योजना का वादा किया है, जिसके तहत उन्हें हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो मुख्यमंत्री लाडकी बहन योजना की तर्ज पर होगी हैं। इसके साथ ही मीना ताई ठाकरे के नाम पर ‘मां साहेब रसोई’ शुरू करने की घोषणा की गई है, जहां 10 रुपये में नाश्ता और दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
घोषणा-पत्र में यह भी कहा गया है कि 700 वर्गफुट तक के घरों को प्रॉपर्टी टैक्स से राहत दी जाएगी और पुनर्विकसित इमारतों में हर फ्लैट को एक पार्किंग स्लॉट सुनिश्चित करने के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा हैं। सार्वजनिक परिवहन को लेकर गठबंधन ने न्यूनतम बस किराया 10 रुपये से घटाकर 5 रुपये करने, नए बस रूट और अतिरिक्त बसें शुरू करने की बात कही।
शिक्षा के क्षेत्र में बीएमसी द्वारा संचालित ‘मुंबई पब्लिक स्कूल’ में जूनियर केजी से लेकर 12वीं तक पढ़ाई की सुविधा देने का वादा किया गया है, जबकि गिग वर्कर्स के लिए ई-बाइक खरीदने हेतु 25,000 रुपये तक के ब्याज-मुक्त ऋण की योजना भी शामिल की गई।
वचननामा जारी करते हुए दोनों ठाकरे बंधुओं ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है और निर्विरोध जीत दिलाने के लिए उम्मीदवारों की ‘चोरी’ की जा रही है। उन्होंने ऐसे मामलों में दोबारा चुनाव कराने और रिटर्निंग अफसरों की कॉल डिटेल्स की जांच की मांग भी उठाई है।
राज ठाकरे ने भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र को उत्तर प्रदेश-बिहार की राह पर ले जाया जा रहा है, जो राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक है।
गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनावों में अविभाजित शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि भाजपा 82 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण राजनीतिक अस्थिरता बनी थी, जिसे बाद में भाजपा के समर्थन से शिवसेना का महापौर बनने के बाद सुलझाया गया था। कांग्रेस 31 सीटों पर सिमट गई थी, एनसीपी को नौ सीटें मिली थीं और एमएनएस को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस बार 15 जनवरी को मतदान और अगले दिन मतगणना प्रस्तावित है, जिससे पहले ठाकरे बंधुओं का यह साथ आना मुंबई की राजनीति में नई समीकरणों को जन्म दे रहा है।



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