Gold and Silver News : साल 2026 की शुरुआत निवेशकों के लिए सोने-चांदी में जबरदस्त मुनाफे के संकेत लेकर आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी के सिर्फ 23 दिनों में ही सोने और चांदी की कीमतों ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है, जिसने शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस हफ्ते सोना ₹12,717 बढ़कर ₹1,54,310 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है, जबकि बीते हफ्ते यह ₹1,41,593 पर था। वहीं चांदी की कीमत भी ₹35,815 की उछाल के साथ ₹3,17,705 प्रति किलो पर पहुंच गई है।
यानी साल की शुरुआत से अब तक सोना करीब ₹21,115 और चांदी ₹81,285 महंगी हो चुकी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा हालात में सोना फिर से ‘सेफ हेवन एसेट’ बन गया है। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर की आशंका और करेंसी मार्केट की अनिश्चितता ने निवेशकों को शेयर बाजार से निकालकर सोने की ओर मोड़ दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकियों से वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में सोना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है।
रुपये की गिरावट ने बढ़ाई महंगाई
भारत में सोने की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी भी है। फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले ₹91.10 के ऑल टाइम लो पर है। इसका सीधा असर यह हुआ कि विदेश से आयात होने वाला सोना और महंगा हो गया, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें ₹1.5 लाख के पार पहुंच गईं।
सेंट्रल बैंक भी भर रहे तिजोरी
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक, खासकर भारत का RBI, लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 2025 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद 2026 की शुरुआत में भी मांग मजबूत बनी हुई है। इससे सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा हो गई है, जिसका सीधा फायदा कीमतों को मिल रहा है।
चांदी की तेजी सिर्फ निवेश की वजह से नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल में बढ़ते इस्तेमाल ने चांदी को जरूरी कच्चा माल बना दिया है। इसके अलावा अमेरिकी कंपनियां टैरिफ के डर से पहले ही भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
अब, आगे क्या?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और ट्रेड वॉर का माहौल जारी रहा, तो 2026 में सोना ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है, जबकि चांदी ₹4 लाख प्रति किलो का स्तर छू सकती है। कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि इस समय सोना-चांदी सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए सबसे मजबूत और भरोसेमंद संपत्ति बन चुके हैं।