'शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण', राहुल गांधी के 'गद्दार' वाले बयान पर नितिन गडकरी का तीखा पलटवार

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की “गद्दार” वाली टिप्पणी की बुधवार को कड़ी निंदा की और इसे “बेहद शर्मनाक” करार दिया।
गडकरी ने कहा कि लोग कांग्रेस की “नफरत की राजनीति” का करारा जवाब देंगे।
राहुल ने बुधवार को अपने लोकसभा क्षेत्र रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करते हुए उन्हें “गद्दार” कहा।

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गडकरी ने राहुल की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणी बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह उनकी अराजक मानसिकता को दर्शाती है।” उन्होंने लिखा, “राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक हैं, लेकिन लोकतंत्र में संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं के लिए इस तरह की और शब्दों का इस्तेमाल किया जाना बेहद निंदनीय है। यह देशवासियों की भावनाओं का अनादर है। देश की जनता ने कांग्रेस की नफरत की राजनीति का करारा जवाब दिया है और आगे भी देगी।

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क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना करते हुए उनके लिए “गद्दार” शब्द का इस्तेमाल किया। राहुल गांधी के इस तीखे हमले के बाद राजनीतिक गलियारों में उबाल आ गया है।

वैचारिक मतभेद बनाम भाषा की मर्यादा

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में संवाद के गिरते स्तर पर बहस छेड़ दी है। जहाँ एक तरफ विपक्ष सरकार पर तीखे हमले करने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं सत्ता पक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च और संवैधानिक पद की एक गरिमा होती है, जिसका सम्मान हर दल के नेता को करना चाहिए। 

नितिन गडकरी के बयान का सार: राजनीति में नीतियों और विचारधारा की लड़ाई तथ्यों के आधार पर लड़ी जानी चाहिए, न कि अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल से। जनता ऐसी नकारात्मक राजनीति का जवाब हमेशा अपने वोट से देती है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस पर क्या सफाई देती है और आगामी संसद सत्र में इस बयान की गूंज किस तरह सुनाई देती है। 



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