शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा माता साहिब देवाजी में हुए हमले ने पंजाब की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह दो वर्षों के भीतर बादल पर हुआ दूसरा हमला है और ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब में अकाली दल की विरासत, नेतृत्व और पंथक राजनीति को लेकर बहस पहले से तेज है।
हम आपको बता दें कि गुरुवार को करीब 1.45 बजे गुरुद्वारे की सीढ़ियों के पास एक व्यक्ति ने सुखबीर बादल पर किरपान से हमला करने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हमलावर को दबोच लिया। हमले में बादल के दाहिने हाथ पर करीब चार से पांच सेंटीमीटर का घाव आया और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत स्थिर बताई गई तथा हाथ में दो-तीन टांके लगाए गए। उनकी सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी भी घायल हुआ, लेकिन दोनों खतरे से बाहर हैं।
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नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक डॉ. निलाभ रोहन के अनुसार, आरोपी लगभग 60-62 वर्ष का है और करीब दो वर्षों से गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में काम कर रहा था। उसकी पहचान 62 वर्षीय जसपाल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक उसने शुरुआती पूछताछ में पंजाब में ड्रग्स के मुद्दे को लेकर नाराजगी की बात कही है, लेकिन हमले का वास्तविक मकसद अभी स्पष्ट नहीं है और किसी गैंग से उसका संबंध भी स्थापित नहीं हुआ है। नांदेड़ पुलिस और एटीएस मामले की जांच कर रही हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि सुरक्षा में चूक नहीं हुई, क्योंकि बादल को जेड-प्लस सुरक्षा प्राप्त थी और सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर को तत्काल रोक लिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हमले की जांच के आदेश दिए और नांदेड़ के एसपी से घटना की जानकारी ली। उन्होंने सुखबीर बादल से फोन पर बात कर उनकी स्थिति जानी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी बादल से बातचीत कर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बादल की पत्नी और बठिंडा से SAD सांसद हरसिमरत कौर बादल को फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। हरसिमरत ने प्रधानमंत्री के इस कदम के लिए आभार जताया और केंद्रीय जांच एजेंसियों को महाराष्ट्र पुलिस के साथ समन्वय करने के निर्देश देने पर भी धन्यवाद दिया। हम आपको यह भी बता दें कि सुखबीर ने हाल ही में एनडीए के साथ करीबी दिखाई है और माना जा रहा है कि पंजाब चुनावों के लिए भाजपा और शिरोमणि अकाली दल फिर से साथ आ सकते हैं।
उधर, शिरोमणि अकाली दल बादल पर हुए हमले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है ताकि पंजाब चुनावों से पहले सहानुभूति हासिल की जा सके। वरिष्ठ अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए पूछा है कि इसके पीछे कौन-सी ताकतें हैं। वहीं बिक्रम सिंह मजीठिया ने तो केंद्र सरकार और फडणवीस सरकार से सीबीआई जांच की मांग कर दी। उन्होंने दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर सुखबीर बादल पर हुए हमले की जांच पर भी सवाल उठाए और दोनों घटनाओं के संभावित संबंधों की जांच की मांग की।
हम आपको याद दिला दें कि दिसंबर 2024 में सुखबीर बादल पर उस समय गोली चलाने की कोशिश हुई थी, जब वह अकाल तख्त द्वारा ‘तनखैया’ घोषित किए जाने के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर में धार्मिक सेवा कर रहे थे। हमलावर नारायण सिंह चौरा को मौके पर ही काबू कर लिया गया था। चौरा के पुराने मामलों और कथित तौर पर जगतार सिंह हवारा से संबंधों का मुद्दा भी बाद की राजनीतिक बहस में उभरा।
इस बीच जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मुद्दा भी पंजाब के राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुरोध के बाद राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने हवारा को उसकी 83 वर्षीय बीमार मां से मिलने के लिए मानवीय आधार पर 10 दिन की पैरोल की सिफारिश की है, हालांकि अंतिम फैसला अभी लंबित है। उल्लेखनीय है कि हवारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अकाली दल लंबे समय से ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई के मुद्दे का समर्थन करता रहा है।
हम आपको यह भी बता दें कि नांदेड़ सिख धर्म के पांच सर्वोच्च तख्तों में से एक, तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब का केंद्र है और गुरु गोबिंद सिंह जी के अंतिम दिनों से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। ऐसे पवित्र स्थान पर एक प्रमुख सिख राजनीतिक नेता पर हमला होना इसलिए भी संवेदनशील है।
कुल मिलाकर, नांदेड़ की घटना केवल एक व्यक्ति पर हुआ हमला नहीं रह गई है। इसने सुरक्षा, अकाली दल के भविष्य, पंथक असंतोष, पुराने मामलों की जांच और पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप को एक साथ फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां हमले के वास्तविक मकसद और किसी व्यापक साजिश की मौजूदगी को कितना स्पष्ट कर पाती हैं, यही आगे की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।





