लखनऊ, 12 अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सड़कों पर वाहनों के तेज शोर और अवैध हूटरों के इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय एवं शांत क्षेत्रों का वर्गीकरण कर उन्हें अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि अब तक ऐसा नहीं किया गया है, तो निर्धारित समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी की जाए। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत निर्धारित ध्वनि सीमाओं का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों का वर्गीकरण जरूरी है। पीठ ने वाहनों में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न की बिक्री, स्थापना और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। साथ ही, निजी वाहनों में मनमाने ढंग से हूटरों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।
पीठ ने स्पष्ट किया कि हूटरों का इस्तेमाल केवल अधिकृत सरकारी वाहनों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं तक सीमित रहना चाहिए। निजी वाहनों में अवैध रूप से हूटर लगाने और उनका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी, 2027 को होगी।
