NMC ने नियमों को वापस लेने पर दी सफाई, मेडिकल कॉलेजों की गुणवत्ता में कोई ढील नहीं

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राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा शिक्षा के मानकों के रखरखाव संबंधी विनियम, 2023 को अधिसूचना से हटाने का उद्देश्य दोहराव वाली प्रक्रियाओं को समाप्त करना है, न कि चिकित्सा शिक्षा के निर्धारित मानकों में ढील देना। देश में चिकित्सा शिक्षा के लिए वैधानिक निकाय आयोग ने 14 अक्टूबर को चिकित्सा शिक्षा के मानकों के रखरखाव संबंधी विनियम (एमएसएमईआर-2023) को अधिसूचना से हटा दिया था। आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘इस विनियम को अधिसूचना से हटाने से किसी भी तरह चिकित्सा शिक्षा के निर्धारित मानकों या एनएमसी की नियामक निगरानी में कोई कमी नहीं आएगी।’’
बयान के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (पीजीएमईबी) को मुख्य रूप से शैक्षणिक मानक, न्यूनतम आवश्यकताएं और शिक्षा संबंधी मानदंड निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आयोग ने कहा कि अधिनियम की धारा 26 के तहत चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) को चिकित्सा संस्थानों का आकलन और निरीक्षण करने, निर्धारित मानकों के अनुपालन की पुष्टि करने तथा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले संस्थानों के खिलाफ उचित नियामक कार्रवाई शुरू करने का विशेष अधिकार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि इन विनियमों के तहत यूजीएमईबी और पीजीएमईबी के माध्यम से संस्थानों के मूल्यांकन, हर साल नवीनीकरण और नियमों को लागू कराने की एक समानांतर व्यवस्था शुरू की गई थी। इससे नियामक कार्यों में दोहराव पैदा हो रहा था।

आयोग ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों और वैधानिक ढांचे की विस्तृत समीक्षा के बाद उसने इस दोहराव को समाप्त करने और नियामक जिम्मेदारियों को एनएमसी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप करने का फैसला किया। आयोग ने कहा कि शिक्षकों, बुनियादी ढांचे, नैदानिक सामग्री, शिक्षण सुविधाओं, उपस्थिति और शैक्षणिक मानकों से जुड़ी सभी मौजूदा न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी तरह लागू रहेंगी। बयान के अनुसार, एमएआरबी के पास मूल्यांकन और निरीक्षण करने का वैधानिक अधिकार बना रहेगा और जरूरत पड़ने पर वह बिना पूर्व सूचना के भी निरीक्षण कर सकता है तथा एनएमसी अधिनियम और चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन एवं रेटिंग संबंधी विनियम, 2023 के तहत नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकता है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया में केवल एक बदलाव किया गया है। एमएसएमईआर-2023 के तहत हर साल नवीनीकरण कराने की अतिरिक्त अनिवार्यता हटा दी गई है। चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट जमा करना, निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन करना, संस्थागत मूल्यांकन कराना और वैधानिक नियमों के तहत कार्रवाई के दायरे में बने रहना अनिवार्य होगा।

आयोग ने कहा, ‘‘एनएमसी चिकित्सा शिक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियमन पारदर्शी और प्रभावी हो तथा उसमें अनावश्यक दोहराव न हो। नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने को नियमों में ढील के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘एनएमसी ने एक-दूसरे से मिलती-जुलती प्रक्रिया को हटाया है, न कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाले सुरक्षा उपायों को।’’



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