पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी 6 दिवसीय (5 से 10 जुलाई) खाड़ी देशों की यात्रा के पहले पड़ाव पर कतर पहुंचे। रविवार को उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। जयशंकर पांच से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा पर हैं।
खाड़ी देशों का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खत्म करने के समझौते के बाद पश्चिम एशिया में राजनीतिक हालात तेज़ी से बदल रहे हैं।
जयशंकर ने कतर में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कतर के प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया।
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं, खासकर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, संपर्क, सुरक्षा और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंधों की समीक्षा की। साथ ही, अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के नये अवसरों पर भी चर्चा की।’’
जयशंकर ने प्रधानमंत्री अल-थानी के साथ पश्चिम एशिया के संघर्ष और उसके असर के बारे में भी चर्चा की। अल-थानी कतर के विदेश मंत्री भी हैं।
उन्होंने भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘क्षेत्र के साथ भारत की भागीदारी में समुदाय के कल्याण के महत्व को रेखांकित किया गया। इन कठिन परिस्थितियों में कतर के समाज के प्रति भारतीय समुदाय की प्रतिबद्धता और योगदान वास्तव में सराहनीय है और इसकी व्यापक प्रशंसा की जा रही है।’’
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जयशंकर ने भारत-कतर साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय समुदाय के अनुभवों और सुझावों की भी सराहना की।
अपनी मौजूदा यात्रा के दौरान, जयशंकर खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के अपने समकक्षों और शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
हफ़्तों तक बढ़ते तनाव के बाद ईरान में युद्धविराम कराने के लिए पाकिस्तान के साथ-साथ कतर और ओमान भी मध्यस्थ के तौर पर सामने आए।
ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शुक्रवार से हफ़्ते भर चलने वाले अंतिम संस्कार की रस्मों के बाद दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता जारी रहेगी।
खाड़ी के चार देशों की यात्रा करने के बाद जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे।
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इसके बाद, वह 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में तीसरी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में शामिल होंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ बातचीत करेंगे।
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