प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने शनिवार को दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को याद किया है। पार्टी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान न्यूजीलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड लैंग ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को एक नई दिशा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए इस बात को साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा उन्हें एक ऐसे विशिष्ट व्यक्ति की याद दिलाती है, जिन्होंने दोनों देशों के आपसी संबंधों में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम योगदान दिया था।
जयराम रमेश ने बताया कि डेविड लैंग वर्ष 1984 से 1989 तक न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री रहे थे। अक्टूबर 1984 में पदभार संभालने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा भारत की ही थी। इस दौरान लैंग का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ बेहतरीन तालमेल रहा और बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ उनके काफी घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध स्थापित हुए, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को एक नया जीवन मिला।
कांग्रेस नेता ने अतीत के सहयोग का उल्लेख करते हुए बताया कि 1950 के दशक में न्यूजीलैंड ने भारत के डेयरी क्षेत्र के विकास और नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। इसके अलावा, भारत में 'श्वेत क्रांति' के प्रमुख सूत्रधार डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत सरकार ने साल 1952-53 में छात्रवृत्ति पर न्यूजीलैंड भेजा था, जिसका उनके जीवन और कार्यों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
जयराम रमेश के अनुसार, 1960 और 1970 के दशक में दोनों देशों के रिश्तों में एक तरह का ठहराव आ गया था, लेकिन डेविड लैंग के प्रधानमंत्री बनने के बाद इसमें फिर से तेजी आई। लैंग ने ही प्रसिद्ध पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी को भारत में न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त नियुक्त किया था। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि नई दिल्ली के 'डिप्लोमैटिक एनक्लेव' में सड़कों के नाम एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे के नाम पर रखे गए हैं।




