भोपाल: MP News: बिजली विभाग के संविदा कर्मी आज बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। इन कर्मियों की मांग है कि उन्हें नए स्वीकृत पदों पर बिना देरी सीधे नियमित किया जाए। सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन न मिलने और वार्ता के प्रयास विफल होने पर कर्मियों में भारी नाराजगी है।
Read More : CG Weather Update Today: प्रदेश के इन इलाकों में फिर होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
MP News: संविदा कर्मियों का कहना है कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री को दो बार वार्ता के लिए पत्र लिखा, लेकिन विभाग के अपर प्रमुख सचिव ने भी समय नहीं दिया। इससे साफ है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। बिजली विभाग में वर्तमान में लगभग 5,000 संविदा कर्मी कार्यरत हैं। सभी की नियुक्ति लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेरिट के आधार पर हुई है। बावजूद इसके वर्षों की सेवा देने के बाद भी उन्हें नियमित नहीं किया गया।
MP News: कर्मियों का कहना है कि विभाग में लंबे समय से कार्यरत संविदाकर्मी जिनमें से कई को 10 से 15 साल तक का अनुभव है निराश होकर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन विभाग में अब तक 100 से अधिक संविदा कर्मी इस्तीफा दे चुके हैं। संविदा कर्मियों के धरने का सीधा असर बिजली आपूर्ति सेवाओं पर भी पड़ सकता है। मीटर रीडिंग, बिल वितरण, नए कनेक्शन, मेंटेनेंस, सुधार कार्य और दफ्तरों का दैनिक कार्य बाधित हो सकता है।
“बिजली विभाग संविदा कर्मियों का धरना” कब और कहाँ हो रहा है?
यह धरना भोपाल में 13 जुलाई को आयोजित किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से संविदा कर्मी शामिल हो रहे हैं।
“बिजली विभाग नियमितीकरण की मांग” क्या है?
संविदा कर्मी चाहते हैं कि उन्हें नए स्वीकृत स्थायी पदों पर बिना देरी नियमित किया जाए, क्योंकि वे वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे हैं।
“संविदा कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया” क्या थी?
इनकी नियुक्ति लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेरिट के आधार पर हुई है, फिर भी इन्हें स्थायी नहीं किया गया है।
“बिजली विभाग धरने का असर” किन सेवाओं पर पड़ेगा?
धरने का असर मीटर रीडिंग, बिल वितरण, मेंटेनेंस, नए कनेक्शन और कार्यालय कार्यों पर पड़ सकता है, जिससे आम जनता को असुविधा हो सकती है।
क्या “सरकार ने संविदा कर्मियों की मांगों पर कोई जवाब” दिया है?
अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। वार्ता के प्रयास भी विफल हो चुके हैं जिससे कर्मियों में नाराजगी है।











