सुरक्षा से लिखवाड़: छोटी सी चिंगारी पूरे बाजार को कर सकती राख, फिर भी बेसमेंट में धड़ल्ले से ‘अवैध कारोबार’ | Illegal business in basement

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खतरों को न्योता दे रही अव्यवस्था

शहर के व्यस्ततम बाजार क्षेत्रों जैसे स्टेशन रोड, गोल बाजार, विश्वकर्मा पार्क, सराफा क्षेत्र हीरागंज क्षेत्र, घंटाघर क्षेत्र आदि में कई बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स हैं, जहां बेसमेंट में न केवल गोदाम, बल्कि पूरी दुकानें, गोडाउन कम रेस्टोरेंट और अन्य व्यापारिक गतिविधियां निर्बाध रूप से चल रही हैं। इनमें से अधिकांश के पास न तो फायर एनओसी है, न ही फायर सेफ्टी उपकरण। बेसमेंट में आग लगने या धुआं भरने की स्थिति में न तो वेंटीलेशन होता है और न ही कोई वैकल्पिक निकास द्वार। ऐसे में वहां फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो जाता है।

यह हैं नियम और कानून

नगर पालिक निगम एवं फायर डिपार्टमेंट के निर्देशों के अनुसार बेसमेंट केवल पार्किंग और स्टोरेज के लिए उपयोग किया जा सकता है, मानव उपस्थिति वाले व्यवसाय (दुकानें, रेस्टोरेंट, ऑफिस आदि) का संचालन निषिद्ध है। हर व्यवसायिक भवन को फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट, स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर और अग्निशमन उपकरण लगाना अनिवार्य है। फायर सेफ्टी मानकों के बिना चल रही गतिविधियां पूर्णत: अवैध हैं और इन पर सीलिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित

दिल्ली के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड के बाद कटनी नगर निगम व प्रशासनिक अधिकारियों ने औपचारिकता निभाते हुए कुछ परिसरों की जांच की थी। कुछ दुकानों को नोटिस भी थमाए गए थे, लेकिन एक-दो दिनों की हलचल के बाद पूरा मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कोई स्थायी कार्य योजना न बनने से अवैध गतिविधियों को खुला संरक्षण मिल गया।

katni besment

यह होनी चाहिए कार्रवाई?

नगर निगम व प्रशासन द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जाए, फायर विभाग के सहयोग से हर व्यापारिक भवन में फायर ऑडिट कराया जाए, जो भी बेसमेंट में अवैध रूप से दुकान या रेस्टोरेंट चला रहे हैं, उन्हें तत्काल नोटिस देकर गतिविधि बंद कराई जाए, बार-बार नियम तोडऩे वालों पर जुर्माना लगाकर उनकी दुकानें सील की जाएं, नगर निगम को अपनी स्वीकृत भवन योजनाओं की समीक्षा कर अनियमित उपयोग पर कार्रवाई करनी चाहिए।

जनता और व्यापारियों की जिम्मेदारी भी जरूरी

प्रशासन जितना दोषी है, उतना ही दोष व्यापारियों का भी है, जो जानबूझकर सस्ते किराये के लालच में बेसमेंट को दुकान के रूप में लेते हैं। जनता को भी अब जागरूक होना होगा, जब आप ऐसे दुकानों में खरीदारी करते हैं, तो आप अनजाने में नियम तोडऩे वालों को बढ़ावा दे रहे होते हैं। बेसमेंट में दुकान खोलना जितना आसान दिखता है, उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है। एक छोटी सी चिंगारी पूरे बाजार को राख कर सकती है। अब भी समय है कि नगर निगम, व्यापारी और जनता मिलकर इस समस्या की जड़ तक पहुंचे, वरना किसी बड़े हादसे के बाद सिर्फ अफसोस ही हाथ लगेगा।

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यह हो रही शहर में मनमानी

केस 01: स्टेशन चौराहा में नगर निगम द्वारा बनवाए गए शॉपिंग कॉम्पलेक्स के बेसमेंट में धड़ल्ले से नियमों को ताक में रखकर एक दर्जन से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। हर प्रकार के नियमों का अनदेखी हो रही है।

केस -02: विश्वकर्मा पार्क से सुभाष चौक की ओर जाने वाले मार्ग में बैंक ऑफ इंडिया के सामने बेसमेंट में धड़ल्ले से दुकानें संचालित हो रही हैं। यहां पर दर्जनों लोग मौजूद रहते हैं, फिर भी नियमों की अदनेखी जारी है।

केस-03: गजानन कॉपलेक्स जो की शहर का प्रमुख बाजार क्षेत्र है, यहां पर भी नियमों को धता बताते हुए शोरूम, दुकानों का संचालन हो रहा है। दो दर्जन दुकानें यहां पर संचालित हो रही हैं, इसे देखने वाला कोई नहीं है।

केस 04: दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर से विश्वकर्मा पार्क की ओर जाने वाले मार्ग में बने कॉम्पलेक्स में भी नियमों की अनदेखी हो रही है। यहां पर भी बेसमेंट में नियमों की अवहेलना करते हुए दुकानों का संचालन हो रहा है, जिम्मेदार कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

केस-05: यह नजारा मुख्य रेलवे स्टेशन मार्ग का है। यहां पर चार स्थानों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बेसमेंट में कारोबार हो रहा है। मनिहारी, क्रॉकरी, बच्चों के खिलौने आदि का कारोबार हो रहा है। बगैर अग्निशमक यंत्रों के यहां पर काम चल रहा है।

अधिकारी ने कही यह बात

प्रदीप मिश्रा, एसडीएम ने कहा बेसमेंट में चलने वाले मनमाने कारोबार के खिलाफ शीघ्र ही जांच कराई जाएगी। नियमों का हर हाल में पालन कराया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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