सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं, पुणे की अदालत ने दी राकांपा नेता को जमानत

By
On:
Follow Us


पुणे की एक अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पदाधिकारी महादेव बालगुडे को जमानत देते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करने मात्र को राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं माना जा सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने महादेव बालगुडे की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार के कार्यों की सराहना करने, उन पर टिप्पणी करने और उनकी आलोचना करने का पूरा अधिकार है।

महादेव बालगुडे को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीरें साझा करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दर्शाने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था, जो देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दस्तावेजों से यह साफ है कि आरोपी ने केवल कुछ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जो सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हैं। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने वाला कोई कार्य किया या राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए किसी को उकसाया।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में बीएनएस की धारा 152 का लागू होना विवाद का विषय है और आरोपी पर लगाई गई अन्य धाराएं जमानती प्रकृति की हैं। चूंकि पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और जांच पूरी हो गई है, इसलिए अदालत ने आरोपी को और अधिक समय तक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं समझी।

बालगुडे को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और कुछ शर्तों के साथ जमानत दी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे सबूतों से छेड़छाड़ न करें, गवाहों को प्रभावित न करें और अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर न जाएं। बालगुडे के वकील समीर शेख ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और सरकार की आलोचना करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।



Source link

For Feedback - vindhyaajtak@gmail.com 

Leave a Comment

Breaking News