मुंबई की एक अदालत ने अपने सहयोगी के साथ बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एक मॉल में आग्नेयास्त्र और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का फर्जी पहचान पत्र लेकर प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 24 वर्षीय छात्र को सोमवार को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ प्रवेश करने के अलावा किसी स्पष्ट दुर्भावनापूर्ण कृत्य का आरोप नहीं है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एस्प्लेनेड कोर्ट) डी. एस. खेडेकर ने मुख्य आरोपी छात्र रोहन पारिख और उसके 49 वर्षीय बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे को 50-50 हजार रुपये के नकद मुचलके पर जमानत दी।
जियो वर्ल्ड प्लाजा में हुई घटना के करीब दो सप्ताह बाद अदालत का यह आदेश आया। अदालत ने कहा कि एक युवा छात्र को कठोर अपराधियों के साथ जेल में रखना उसके लिए प्रतिकूल होगा और उसके सुधार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। यह घटना निकट स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में प्रधानमंत्री के शामिल होने से ठीक पहले सात सितंबर को जियो वर्ल्ड प्लाजा में हुई थी।
मॉल में प्रवेश के दौरान सुरक्षा गार्ड ने कुंडे के पास आग्नेयास्त्र पाया, जिसके बाद आरोपियों को रोक लिया गया। इस पर दोनों व्यक्ति बहस करने लगे और उनमें से एक ने पीएमओ से होने का दावा करते हुए एक पहचान पत्र की तस्वीर दिखाई। अदालत ने कहा कि ऐसे कोई आरोप नहीं थे कि कुंडे लाइसेंस वाला आग्नेयास्त्र लेकर नुकसान पहुंचाने के इरादे से मॉल में घुसा था।
वकील सतीश मानेशिने के माध्यम से दायर अपनी जमानत याचिका में पारिख ने दलील दी कि वह किसी वीवीआईपी दौरे या हाल में जारी निषेधाज्ञा से अनजान था और निजी कारणों से मॉल गया था। पुलिस ने पूर्व में अदालत को बताया था कि पारिख के घर की तलाशी में पीएमओ से जुड़े कई जाली दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें चैटजीपीटी के जरिये तैयार किया गया था।


