इंदौर: Bhaiyyu Maharaj Suicide Case: आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज की आत्महत्या मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। महाराज की दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दाखिल किया है जिसमें उन्होंने महाराज के सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स उन्हें वापस सौंपे जाने की मांग की है।
Bhaiyyu Maharaj Suicide Case: यह वे ही इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं जिन्हें भय्यू महाराज की आत्महत्या के समय पुलिस ने जांच के दौरान जब्त किया था। डॉ. आयुषी का तर्क है कि अब जब मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है तो इन निजी वस्तुओं को लौटाया जाना चाहिए। बहरहाल इस आत्महत्या मामले में कोर्ट ने आरोपी विनायक शरद और पलक को छह साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। तीनों आरोपी करीब तीन साल तक अंडर ट्रायल रहे और फिर उन्हें ज़मानत मिली।
Read More : कोटा की सहपाठी छात्रा का अपहरण कर होटल ले गया युवक, फिर हैवानियत की सारी हदें की पार, आरोपी फरार
Bhaiyyu Maharaj Suicide Case: हालांकि, इस आवेदन पर सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ये इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अब भी साक्ष्य जांच से जुड़ी अहम वस्तुएं हैं और भविष्य में कोर्ट इन्हें दोबारा तलब कर सकती है। इस आधार पर उन्होंने गैजेट्स को लौटाए जाने पर आपत्ति दर्ज की है। फिलहाल कोर्ट में यह मामला लंबित है और अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार किया जा रहा है।
“भय्यू महाराज आत्महत्या मामला” में आरोपी कौन-कौन हैं?
इस मामले में तीन आरोपी थे – विनायक शरद, पलक और एक अन्य। कोर्ट ने इनमें से दो को 6 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
“भय्यू महाराज आत्महत्या मामला” में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स क्यों जब्त किए गए थे?
ये सभी गैजेट्स (मोबाइल, लैपटॉप आदि) आत्महत्या के कारणों की जांच के लिए पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर जब्त किए थे।
क्या डॉ. आयुषी को “भय्यू महाराज आत्महत्या मामला” में इलेक्ट्रॉनिक सामान वापस मिलेगा?
डॉ. आयुषी ने गैजेट्स की वापसी के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दिया है, लेकिन मामला अब भी कोर्ट में लंबित है।
“भय्यू महाराज आत्महत्या मामला” में कोर्ट का अंतिम निर्णय क्या था?
कोर्ट ने मुख्य आरोपियों को दोषी पाते हुए 6 साल की सजा सुनाई, हालांकि कुछ समय वे अंडर ट्रायल रहने के बाद ज़मानत पर बाहर आए थे।
“भय्यू महाराज आत्महत्या मामला” अब किस स्थिति में है?
मामले की कुछ प्रक्रियाएं जैसे जब्त सामान की वापसी आदि अब भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार किया जा रहा है।











