भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने बुधवार को उद्योग जगत के साथ आयोजित संपर्क कार्यक्रम के दौरान मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में अपनी परिचालन संबंधी जरूरतों और तकनीकी प्राथमिकताओं को साझा किया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि परिचालन संबंधी आवश्यकता है। यहां विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को ‘आईएएफ की रोडमैप पुस्तिका’ वितरित की गई।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वायु शक्ति में तेजी से हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए इस रूपरेखा में विभिन्न स्तरों वाली और आपस में नेटवर्क के माध्यम से जुड़ी मानवरहित प्रणालियों की एक शृंखला की परिकल्पना की गई है। मंत्रालय ने कहा कि इससे मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की परिचालन संबंधी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। उसने कहा कि इस कार्यक्रम ने भारतीय वायुसेना को अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और तकनीकी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से पेश करने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान किया।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल 14 सितंबर 2026 को पोखरण में आयोजित आईएएफ ड्रोनथॉन 2026 के दौरान जारी किए गए ‘आईएएफ के मानवरहित एवं स्वायत्त प्रणालियों संबंधी रोडमैप’ पर आधारित थी। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि मानवरहित प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि परिचालन संबंधी आवश्यकता है। रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा कि ऐसी स्वदेशी क्षमताओं के विकास पर जोर है, जो परिचालन की दृष्टि से प्रासंगिक, विश्वसनीय और मजबूत हों।
बयान में कहा गया कि भारतीय वायुसेना का लक्ष्य एक मजबूत घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना भी है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहयोग और योगदान दे सके। बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम में विभिन्न ड्रोन कंपनियों और उनसे जुड़े उद्योग भागीदारों के लगभग 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो भारतीय वायुसेना और मानवरहित प्रणालियों से जुड़े उद्योग जगत के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
