उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कंपनियों की सफलता सिर्फ प्रोजेक्ट या एसेट्स से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव से आंकी जाएगी। अपने संबोधन में अडाणी ने कहा कि अडाणी समूह देश के 24 राज्यों में 700 से अधिक कार्यस्थलों पर काम कर रहा है और करीब 4 लाख कर्मचारियों, पार्टनर्स और ठेकेदारों के साथ जुड़ा है। ऐसे में कंपनी की जिम्मेदारी सिर्फ प्रोजेक्ट पूरा करने तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और समुदायों के विकास तक भी है। उन्होंने कहा कि अब सभी परियोजना स्थलों पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले आसपास के जिलों के लोगों को अवसर मिलेगा, इसके बाद राज्य और जरूरत पड़ने पर अन्य क्षेत्रों से भी लोगों को जोड़ा जाएगा।
अडाणी ने कहा, “जब हम कोई प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, तो हम सिर्फ काम नहीं करते, बल्कि देश का भविष्य बनाते हैं।
🔹 कामगारों के लिए बड़ी सुविधाएं
कामगारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर पहल की जा रही है—
खदान और परियोजनाओं में कार्यरत लगभग 50,000 कामगारों के लिए वातानुकूलित आवास में एक विशाल किचन, जहां रोजाना लगभग 1 लाख लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि हर कामगार का अधिकार है कि वह सम्मान के साथ जी सके और काम कर सके।
🔹 स्किल डेवलपमेंट और रोजगार वृद्धि
अडाणी समूह स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दे रहा है। आने वाले समय में स्किल सेंटर के माध्यम से कामगारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अनस्किल्ड से स्किल्ड, सुपरवाइजर और नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंच सकें।
इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
🔹 निर्णय प्रक्रिया में सुधार
समूह द्वारा कार्यों में तेजी लाने के लिए तीन-स्तरीय निर्णय प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे परियोजनाओं में निर्णय पहले की तुलना में अधिक तेजी से लिए जा सकेंगे।
🔹 स्थानीय उद्यमियों को भी मिलेगा मौका
अडाणी ने कहा कि कंपनी छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले उद्यमियों को भी आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। पार्टनर्स को वित्तीय सहायता, बेहतर रिटर्न और लंबे समय तक काम करने के अवसर दिए जाएंगे, जिससे वे भी बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन सकें।
🔹 देश के विकास से जुड़ी परियोजनाएं
मुंद्रा पोर्ट, खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स को देश के विकास से जोड़ते हुए अडाणी ने कहा कि ये केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि भारत की प्रगति के साधन हैं।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर दिया गया यह संदेश स्पष्ट करता है कि अब उद्योगों का फोकस केवल विकास नहीं, बल्कि कामगारों के सम्मान, जीवन स्तर और स्थानीय रोजगार पर भी केंद्रित हो रहा है।