Tamil Nadu में त्रिशंकु विधानसभा: सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK, सरकार बनाने के लिए इन 3 समीकरणों पर टिकी नज़र

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को एक रोमांचक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) 234 सीटों वाले सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि, वह बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से 10 सीटें दूर रह गई है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राज्य में ‘त्रिशंकु विधानसभा’ की स्थिति है। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि TVK सत्ता की कुर्सी तक पहुँचने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है। पार्टी वर्तमान में सरकार बनाने के तीन मुख्य विकल्पों पर विचार कर रही है:

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विकल्प 1: DMK खेमे की छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन
TVK के लिए सबसे सहज रास्ता उन छोटी पार्टियों को साथ लाना है जो वर्तमान में DMK गठबंधन का हिस्सा रही हैं। वैचारिक निकटता और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए यह विकल्प सबसे मजबूत माना जा रहा है।
संभावित समीकरण:
TVK: 108
कांग्रेस: 5
वामपंथी पार्टियां: 4
IUML: 2
VCK: 2
कुल: 121 (बहुमत से 3 ज्यादा)
इस मॉडल के तहत TVK एक व्यापक प्रगतिशील गठबंधन का नेतृत्व कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ प्राथमिक बातचीत के दौर शुरू हो चुके हैं।
विकल्प 2: ‘मुद्दों पर आधारित’ मिला-जुला गठबंधन
दूसरा विकल्प थोड़ा चुनौतीपूर्ण लेकिन व्यावहारिक है। इसमें TVK, DMK और AIADMK दोनों ही खेमों की छोटी पार्टियों को एक साथ लाने की कोशिश कर सकती है। यह एक ऐसा मंच होगा जहाँ वैचारिक मतभेदों के बजाय ‘विकास’ और ‘स्थिरता’ को प्राथमिकता दी जाएगी।
संभावित संरचना:
TVK: 108
कांग्रेस: 5 | PMK: 4 | IUML: 2 | VCK: 2
कुल: 121
इस मॉडल में शामिल होने वाली सभी पार्टियों को कैबिनेट में हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव है, ताकि सरकार की स्थिरता बनी रहे और किसी एक सहयोगी के हटने से बहुमत पर संकट न आए।
विकल्प 3: AIADMK का बाहरी समर्थन (अहम विकल्प)
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे विकल्प की है। इसमें TVK किसी भी बड़े या जटिल गठबंधन में फँसने के बजाय सीधे AIADMK (47 सीटें) से बाहरी समर्थन की उम्मीद कर रही है।
संभावित संरचना:
TVK: 108 (सरकार में)
AIADMK: 47 (बाहरी समर्थन)
इस व्यवस्था में TVK को अपनी नीतियां लागू करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और उसे कई छोटे दलों की मांगों के बीच संतुलन नहीं बनाना होगा। हालांकि, इसके लिए AIADMK के साथ एक ठोस ‘सत्ता साझाकरण’ या ‘मुद्दों पर आधारित समर्थन’ का समझौता करना होगा।
 

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आगे की राह
तमिलनाडु के राज्यपाल की भूमिका अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते पहला मौका TVK को मिलने की संभावना है। राज्य की जनता एक स्थिर शासन की उम्मीद कर रही है, लेकिन गठबंधन की राजनीति के इस दौर में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर समझौतों की अग्निपरीक्षा से होकर गुजरेगा। 



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