Varanasi में PWD का बड़ा एक्शन, Heavy Force की तैनाती के बीच Waqf संपत्ति पर चला Bulldozer

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लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और जिला प्रशासन ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के घनी आबादी वाले दलमंडी क्षेत्र में स्थित वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित ‘मुसाफिर खाना’ से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा विध्वंस अभियान शुरू किया। नगरपालिका के निर्देशों के अनुसार अतिक्रमण की गई भूमि को वापस लेने या अनधिकृत निर्माणों को हटाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान ने ऐतिहासिक वाणिज्यिक जिले को उच्च सुरक्षा क्षेत्र में बदल दिया है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी), स्थानीय पुलिस इकाइयों और जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित 300 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है।
 

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सुरक्षा व्यवस्था के बारे में बताते हुए एसीपी दशाश्वमेध ने कहा कि पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी को रोकने के लिए हमने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। चिन्हित ढांचों को हटाया जा रहा है, इसलिए स्थिति नियंत्रण में है। एसीपी अतुल अंजन त्रिपाठी ने पुष्टि की कि विध्वंस सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक वक्फ संपत्ति, मुसाफिर खाना है, जिस पर विध्वंस कार्य चल रहा है। संबंधित विभाग ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और पर्याप्त समय देने के बाद आज विध्वंस कार्रवाई शुरू की गई है।
एसीपी त्रिपाठी के अनुसार, उच्च स्तरीय सुरक्षा उपायों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती, लोगों की आवाजाही को सीमित करने के लिए बैरिकेडिंग और ड्रोन के माध्यम से निगरानी शामिल है। पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता केके सिंह ने कहा कि इसके लिए उचित समय दिया गया था और आज विध्वंस की कार्रवाई जारी है… यह कार्रवाई लगातार दो दिनों से चल रही है। इस बीच, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में जारी बुलडोजर न्याय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। 3 फरवरी को न्यायालय ने टिप्पणी की कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी प्रतिबंध के बावजूद दंडात्मक विध्वंस जारी हैं।
 

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न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने प्रश्न उठाया कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जा रहा है और क्या राज्य के पास किसी आरोपी के आवास को ध्वस्त करने का अधिकार है या उसे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी अपराध के तुरंत बाद विध्वंस कार्यपालिका के विवेक का विकृत प्रयोग हो सकता है और कहा कि विध्वंस की “उचित आशंका” नागरिकों को न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग करने के लिए पर्याप्त है। मामले की आगे की सुनवाई 9 फरवरी को होनी है।





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