अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेस

By
On:
Follow Us


अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौते को लेकर देश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता या भूमिका मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है। साथ ही, पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के रुख को “तुष्टिकरण” करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को भारत के हितों के लिए नुकसानदेह बताया।

इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में नई सियासी हलचल! समाजवादी पार्टी में अंदरूनी फूट! ओम प्रकाश राजभर का दावा- ‘बागी बलिया’ का लाल करेगा अगुवाई

रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस समझौते का नाम इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) रखा जाना ही इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रभाव में नया उभार आया है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वही देश है जिसे नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर लगभग अलग-थलग कर दिया था।
रमेश ने दावा किया कि यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की दिशा और शैली दोनों के लिए एक गंभीर झटका है।

इसे भी पढ़ें: Dollar vs Rupee | अमेरिकी फेड के सख्त रुख से रुपया 21 पैसे फिसला, डॉलर की मजबूती के बीच शेयर बाजार भी सुस्त


कांग्रेस नेता ने कहा, पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में पहले से कहीं अधिक गहराई से शामिल हो चुका है, जिसके भारत के लिए गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
रमेश ने कहा, यदि यह एमओयू अपनी भावना और शब्दों, दोनों के अनुरूप लागू होता है, तो यह एक बड़ी प्रगति होगी। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए मेमोरेंडम ऑफ मिसअंडरस्टैंडिंग (गलतफहमी का समझौता) बन जाने की भी संभावना है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि आने वाले 60 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, यह एमओयू स्वयं ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और कुछ हद तक अप्रत्याशित उपलब्धियां लेकर आया है।

ईरान ने अपनी दृढ़ता और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया है। जिन जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) देशों ने ईरान के जवाबी हमलों का पूरा भार झेला है, उन्होंने इस एमओयू का सतर्कता के साथ स्वागत किया है। लेकिन वे निस्संदेह अन्य देशों के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करेंगे।
उनके मुताबिक, यह एमओयू इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्पष्ट पराजय है, हालांकि वह अब भी विभिन्न तरीकों से इसे विफल कर सकते हैं।
रमेश ने कहा, बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुके हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से उनके प्रति अपनी नाराज़गी और निराशा व्यक्त की है। केवल प्रधानमंत्री मोदी ही लेबनान, गाज़ा और पश्चिमी तट सहित पूरे क्षेत्र में नेतन्याहू की कार्रवाइयों के समर्थन में अडिग बने हुए हैं।

मोदी की इज़राइल के प्रति यह अंधभक्ति हमारे देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रही है।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यह एमओयू अमेरिका के लिए एक गंभीर झटका है, जिसने इज़राइल के साथ मिलकर 28 फ़रवरी, 2026 को ईरान के विरुद्ध अधिकतम उद्देश्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, लेकिन वे लक्ष्य पूरे नहीं हो सके।
उन्होंने दावा किया, एक बार फिर सैन्य शक्ति की सीमाएं उजागर हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप के प्रति लगातार अपनाई जा रही तुष्टिकरण की नीति का ताज़ा उदाहरण बुधवार रात देखने को मिला, जब ट्रंप–मोदी द्विपक्षीय बैठक पर भारतीय विदेश मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य जारी किया गया। यह (तुष्टिकरण) शर्मनाक है और वास्तव में राष्ट्र-विरोधी है।



Source link

For Feedback - vindhyaajtak@gmail.com 

कुछ छूट न जाए ....

Leave a Comment

Breaking News