दो बाघों के बदले एमपी को मिले थे दो नर किंग कोबरा
6 अप्रैल 2025 को कर्नाटक के पिलिकुला बायोलॉजिकल पार्क मैंगलोर से दो नर किंग कोबरा, आठ वर्षीय ‘नागशयना’ और पांच वर्षीय ‘नागार्जुन’को मध्यप्रदेश लाया गया था। वन्यप्राणी आदान-प्रदान योजना के तहत भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में इन्हें रखा गया था। इस आदान-प्रदान में मध्य प्रदेश ने कर्नाटक को दो बाघ दिए थे। इन दोनों किंग कोबरा को विशेष रूप से तैयार किए गए तापमान-नियंत्रित बाड़ों में रखा गया था। यहां दोनों को 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी मे रखा गया और मेडिकल स्टाफ की देखरेख की व्यवस्था भी थी।
18 जून 2025 को अचानक हुई मौत
बता दें कि बीते दिनों 17 जून 2025 तक ‘नागार्जुन’ की गतिविधियां सामान्य थीं, लेकिन 18 जून 2025 की सुबह सीसीटीवी फुटेज में कोई हलचल न दिखने पर कर्मचारियों ने बाड़े की जांच की, जहां वह मृत पाया गया।
किंग कोबरा की मौत के कारण
मामले में वन विहार निदेशक अवधेश मीणा के मुताबिक ‘नागार्जुन के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे। उसकी मौत का कारण जानने के लिए जबलपुर की नानाजी देशमुख वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वन्यजीव फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम को पोस्टमार्टम के लिए बुलाई गई थी।’ पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान यही है कि गर्मी, आहार या अनुकूलन की समस्याएं किंग कोबरा की मौत का कारण हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश में लुप्त हो चुका है किंग कोबरा
सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में किंग कोबरा को फिर से बसाने की योजना को अपनी प्राथमिकता बनाया था। जनवरी 2025 में भोपाल में आयोजित भारतीय वन सेवा की बैठक में उन्होंने कहा था, ‘किंग कोबरा, जो कभी मध्य प्रदेश के जंगलों में पाया जाता था, अब लगभग लुप्त हो चुका है। इसे वापस लाना न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी है, बल्कि यह अन्य जहरीले सांपों की आबादी को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा।’
दुनिया का सबसे लंबा और जहरीला सांप है किंग कोबरा

एमपी को क्यों है किंग कोबरा प्रोजेक्ट की जरूरत?

वन विहार में 10 एकड़ में बनाया जाना है किंग कोबरा ब्रीडिंग सेंटर

किंग कोबरा की अचनाक मौत से उठे सवाल
‘नागार्जुन’ की अचानक मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किंग कोबरा को ठंडा और नम वातावरण चाहिए, जो मध्य प्रदेश की गर्म जलवायु में प्रदान करना चुनौतीपूर्ण है। भोपाल में मई-जून की भीषण गर्मी के बावजूद, वन विहार में तापमान-नियंत्रित बाड़े और ह्यूमिडिफायर की व्यवस्था की गई थी। फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये उपाय पर्याप्त थे।
पिलिकुला बायोलॉजिकल पार्क के एक्सपर्ट्स की मानें तो किंग कोबरा एक महीने तक बिना भोजन के रह सकता है और ‘नागार्जुन’ की गतिविधियां मंगलवार तक सामान्य थीं। उसे जीवित सांपों का आहार दिया जा रहा था, जो उसकी प्राकृतिक खुराक थी। फिर भी, अचानक मृत्यु ने अनुकूलन, तनाव या किसी अज्ञात स्वास्थ्य समस्या की आशंका को बल दिया है।

एमपी कांग्रेस को मिला मोहन सरकार को घेरने का मौका
विपक्षी नेता जीतू पटवारी ने इस घटना को सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का मौका बनाया। उन्होंने कहा, ‘जब सरकारी कर्मचारियों का वेतन घोटाले में जा रहा है, तब सरकार किंग कोबरा जैसे जोखिम भरे प्रोजेक्ट्स पर पैसा खर्च कर रही है।’

फिर से कर्नाटक से लाया जाएगा किंग कोबरा
बता दें कि अब ‘नागार्जुन’ की मौत के बाद मध्य प्रदेश में केवल एक ही किंग कोबरा, ‘नागशयना’, इंदौर के चिड़ियाघर में बचा है। वन विभाग ने अब कर्नाटक से मादा किंग कोबरा लाने की कवायद पर तेजी से काम करने का फैसला लिया है। जितनी जल्दी किंग कोबरा लाया जाएगा उतना ही जल्दी किंग कोबरा संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सकेगा। मुख्य वन्यजीव वार्डन शुभरंजन के मुताबिक टीम इस घटना से सबक लेगी और भविष्य में बेहतर तैयारी करेगी। किंग कोबरा का संरक्षण उनकी प्राथमिकता है। जानकारी के मुताबिक वन विहार में ब्रीडिंग सेंटर के लिए 10 एकड़ जमीन आवंटित की गई है, जिस पर किंग कोबरा की इस परियोजना को स्थापित किया जाएगा।
एक्सपर्ट का सुझाव, मध्य प्रदेश सरकार उठाए ये कदम

कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि फिलहाल तो ‘नागार्जुन’ की मौत ने मध्य प्रदेश की किंग कोबरा संरक्षण परियोजना को पछाड़ दिया है। लेकिन यह दुखद खबर एक अवसर भी लाई है कि अब सरकार अपनी रणनीति को और मजबूत कर इस दिशा में बेहतर काम कर सकती है। किंग कोबरा न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की जैव विविधता को समृद्ध भी बनाता है। इस घटना ने यह तो साफ कर दिया है कि वन्यजीव संरक्षण में उत्साह के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संसाधन बेहद जरूरी है। अब देखना ये होगा कि क्या मध्य प्रदेश इस चुनौती को अवसर में बदल पाएगा?











