जिला प्रशासन की पहल, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित शासकीय अधिकारियों के सहयोग से इन स्थलों की पहचान कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इन जलाशयों के निर्माण और पुनर्जीवन से हजारों किसानों को कृषि एवं सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। अदाणी फाउंडेशन द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत धिरौली, बजौड़ी, खनुआ टोला, डोंगरी, बाईसा बूढ़ा, रैला, बंधौरा, नगवा, खैराही, करसुआराजा, मझौली एवं तीनगुड़ी सहित विभिन्न गांवों में नए तालाबों का निर्माण कराया जाएगा। वहीं धिरौली, डोंगरी, उतानी पाठ, जमगढ़ी, सुहीरा, अमिलिया, बंधौरा, बेतरिया, चौरा, उज्जैनी, देवरा एवं गोरा गांवों में पुराने जलाशयों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
अदाणी फाउंडेशन के इन प्रयासों से संचित जल स्थानीय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। वर्तमान समय में कई पारंपरिक जल स्रोत मानवीय उपेक्षा और प्रदूषण के कारण समाप्ति के कगार पर हैं।
इस स्थिति को सुधारने के लिए अदाणी समूह के सीएसआर एवं पर्यावरण विभाग द्वारा व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय समुदाय को जल संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना भी है। सिंगरौली जिले के किसानों द्वारा जलाशयों के निर्माण और पुनर्जीवन की मांग की जा रही थी, जिसे पूरा किया जा रहा है।
पूर्व में तालाब ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करते थे, जिनका उपयोग पेयजल, सिंचाई और धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता था। हालांकि, रखरखाव की कमी और बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य के चलते इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
ऐसे में इन जल स्रोतों का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इन दिनों तालाब गडढ़े का रूप लेता जा रहा है और पानी का स्तर नीचे जाने से तालाब का पानी भी बड़ी तेजी से सूखने लगा है। अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों की स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सराहना की जा रही है, और इसे जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।