मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में दान के पैसों की चोरी का गंभीर आरोप सामने आया है। मंदिर के ट्रस्टियों ने दावा किया है कि हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और उन्होंने इस मामले की सरकारी जांच की मांग की है। ट्रस्टियों का मानना है कि इस चोरी में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
दान चोरी का आरोप
सिद्धिविनायक मंदिर, जो अपनी अपार संपत्ति और भक्तों द्वारा दिए जाने वाले दान के लिए जाना जाता है, अब एक बड़े घोटाले की चपेट में आ गया है। मंदिर के ट्रस्टियों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि दान के रूप में आई भारी रकम का गबन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस चोरी के कारण मंदिर को सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
सरकारी जांच की मांग
इस गंभीर आरोप के बाद, ट्रस्टियों ने सीधे सरकार से हस्तक्षेप करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि उनके पास ऐसे “ठोस कारण” हैं जिनके आधार पर वे यह विश्वास करते हैं कि यह घोटाला केवल छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने इस बात की भी आशंका जताई है कि इसमें मंदिर प्रशासन से जुड़े उच्च पदस्थ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
उच्च अधिकारियों पर संदेह
ट्रस्टियों ने अपनी मांग में यह भी कहा है कि जांच के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए। यह पहली बार है जब सिद्धिविनायक मंदिर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे भक्तों के बीच भी चिंता का माहौल है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, ट्रस्टियों की यह मांग मामले की गंभीरता को दर्शाती है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।










