Lord Vishnu: 16 अगस्त तक रहेगा भगवान विष्णु का प्रिय अधिक मास; जानिए

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Lord Vishnu: हिंदू कैलेंडर (Hindu calendar) में हर तीन साल में एक बार आने वाले एक अतिरिक्त महीने को अधिकमास (Adhikamas) कहा जाता है। जो आमतौर पर 32 महीने और 16 दिन के बाद आता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अधिकमास (Adhikamas), मलमास, पुरूषोत्तम मास और मलिम्लुच मास कहा जाता है। इस वर्ष श्रावण मास (Sawan) अधिक चल रहा है। जो 17 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। बृहदैवज्ञरंजन ग्रंथ में कहा गया है कि सावन (Sawan) माह में अधिकमास (Adhikamas) होने से सभी कार्यों में समृद्धि बढ़ती है। इस योग से मेहनतकश लोगों को लाभ और सुख मिलेगा। कल्याण होगा, रोग कम होंगे।

अधिकमास (Adhikamas) में फल की इच्छा से किए गए लगभग सभी कार्य वर्जित हैं और सभी आवश्यक कार्य फल की आशा के बिना भी किए जा सकते हैं। नए कपड़े, आभूषण, फ्लैट, मकान, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, नए वाहन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदने और पहनने पर रोक नहीं है और न ही प्रतिबंधित है। इस माह में कोई भी संस्कार जैसे अभिषेक, दीक्षा, विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण, अष्टक श्राद्ध आदि वर्जित हैं।

अतिरिक्त जनगणित

सौर वर्ष सूर्य की गति पर आधारित होता है, चंद्र वर्ष चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। हिंदू कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित है। एक सौर वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354.36 दिनों में समाप्त होता है। लगभग हर तीन साल (32 महीने, 16 दिन, 4 घंटे) में ये चंद्र दिवस लगभग एक महीने के बराबर होते हैं। इसलिए ज्योतिषीय गणना को सही रखने के लिए तीन साल के बाद चंद्र मास में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे अधिकमास (Adhikamas) कहा जाता है।

चांद पर इसके पीछे पूरी वैज्ञानिक पद्धति

चांद पर इसके पीछे पूरी वैज्ञानिक पद्धति है। यदि केवल चन्द्रमासों (moon months) का ही व्यवहार किया जाता तो व्रत का उत्सव निश्चित समय के स्थान पर पूरे वर्ष भर मनाया जाता। अत: महर्षियों ने धर्मशास्त्र का पालन करने के लिए अधिक मास की व्यवस्था की।

 

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